लाखों लोगों की बीमे की रकम पर संकट, डूब सकती है गाढ़ी कमाई

इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (IL&FS) बॉन्ड का जहर, छूत की बीमारी की तरह तेजी से फैल रही है. इसका वायरस बचतकर्ताओं की तुलना में बड़े निकाय तक फैल चुका है और आने वाले आम चुनाव से पहले ये सरकार के लिए अच्छी खबर नहीं है. तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता बृंदा करात ने आईएल एंड एफएस के इस बेहद खराब बॉन्ड में 15 लाख वेतनभोगियों के फंसने पर चिंता जाहिर की है.

सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय है डाक जीवन बीमा

डाक जीवन बीमा (पीएलआई) पॉलिसी धारकों के आईएल एंड एफएस बॉन्ड में फंसना सीधे तौर पर सरकार के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है. अब इस हालत में सरकार के लिए यह जरूरी है कि इन बॉन्ड में आई भारी गिरावट को अपने संज्ञान में ले और इससे पैदा हो रही घबराहट को कम करने के लिए तत्काल इसके सुधार रणनीति को अपनाए.

दरासल, सरकार की चिंता का विषय यह है कि पीएलआई पॉलिसी धारकों की सूची में साल 2016-17 के आखिर में और 2,13,323 नई पॉलिसी जुड़ गई. जिसके बीमा की रकम  11,096.67 करोड़ रुपये है. वित्त वर्ष 2016-17 के आखिर में कुल पॉलिसी की संख्या 46.8 लाख थी. इस कुल पॉलिसी की रकम 1,13,084.31 करोड़ रुपये थी और ये आंकड़ा अपने आप में एक बड़ी रकम है. साथ ही बताया गया है कि इस वित्त वर्ष के अंत में शेष निधि 55,058.61 करोड़ रुपये जबकि किस्त से प्राप्त आय की रकम 7,233.89 करोड़ रुपये था.

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