तुरा लोकसभा सीट: क्या पीए संगमा की विरासत बचा पाएंगी बेटी अगाथा?

भारत के पूर्वोत्तर राज्य मेघालय की तुरा लोकसभा सीट पर पहले चरण में 11 अप्रैल को वोटिंग होगी. इसके बाद 23 मई को चुनाव नतीजे आएंगे. इस सीट पर कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी का अच्छा खासा प्रभाव है.

लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है. इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के राज्य मेघायल में सियासी उठक पटक तेज हो गई है. इस राज्य में लोकसभा की दो सीटे हैं, जिन पर पहले चरण में 11 अप्रैल को वोटिंग होनी है. इसके बाद 23 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे. इन सीटों पर मुख्य लड़ाई कांग्रेस, एनसीपी और दिवंगत पीए संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के बीच रहती है.

मेघालय की शिलांग सीट से कांग्रेस के नेता विंसेंट एच. पाला सांसद हैं, तो वहीं दूसरी लोकसभा सीट तुरा से नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के नेता कॉनरॉड के. संगमा सांसद हैं. आइए तुरा लोकसभा सीट के सियासी हालात के बारे में विस्तार से चर्चा करें.

राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि

तुरा लोकसभा सीट पर अब तक कुल 15 बार चुनाव और उपचुनाव हो चुके हैं. इस सीट को पहले कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. इस सीट पर कांग्रेस ने आठ बार जीत दर्ज की. हालांकि साल 1999 के बाद से इस सीट पर एनसीपी, एनपीपी और तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है. साल 2014 और 2009 के लोकसभा चुनाव में एनपीपी ने जीत दर्ज की है.

तुरा लोकसभा क्षेत्र में 24 विधानसभा क्षेत्रों को समाहित किया गया है. यह इलाका पश्चिम गारो हिल्स जिले का पर्वतीय शहर है. यह पहाड़ियों की तलहटी में बसा है. माना जाता है कि यहां दुरामा देवता इन पर्वतों में वास करते हैं. यह गारो हिल्स जिले का मुख्यालय भी कहा जाता है. इसके अलावा क्षेत्र गारो जनजाति के लोगों का सांस्कृतिक और प्रशासनिक केन्द्र है. यहां बलफकरम राष्ट्रीय उद्यान, नोकरेक राष्ट्रीय उद्यान है.

2014 का जनादेश

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में तुरा सीट से पीए संगमा ने जीत दर्ज की थी. संगमा लोकसभा के स्पीकर भी रहे थे. बतौर एनपीपी प्रत्याशी उन्होंने कांग्रेस पार्टी के डैरिल विलियम चेरान मोमिन को करीब 39 हजार 716 वोटों से हराया था.  पीए संगमा को साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 2 लाख 39 हजार 301 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार डेरिल विलियम चेरान मोमिन को एक लाख 99 हजार 585 मत हासिल हुए थे. इस चुनाव में 19 हजार 185 वोटरों ने नोटा का इस्तेमाल किया था.

पीए संगमा के निधन के बाद उपचुनाव

साल 2016 में पीए संगमा के निधन होने की वजह से इस सीट पर उपचुनाव हुए. इस बार पीए संगमा के बेटे कोनराड संगमा ने जीत दर्ज की. हालांकि 2018 में वो राज्य के मुख्यमंत्री बन गए. कोनराड के इस्तीफे के बाद से यह सीट अभी तक खाली है.

वहीं, अगर 2009 के लोकसभा चुनाव की बात करें, तो अगाथा संगमा ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी. अब एक बार फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री अगाथा संगमा को उम्मीदवार बनाया गया है. अगाथा तीसरी बार लोकसभा चुनाव लड़ने जा रही हैं. अगाथा भारत सरकार की 15वीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में ग्रामीण विकास राज्यमंत्री रह चुकी हैं. वो पीए संगमा की बेटी और राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा की बहन हैं.

admin