PM मोदी का ब्लॉग वार, वंश की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती है कांग्रेस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह एक ब्लॉग लिख कांग्रेस को घेरा. उन्होंने संविधान, सरकारी संस्थान, इमरजेंसी और वंशवाद के मुद्दे पर कांग्रेस पर निशाना साधा.

लोकसभा चुनाव की जंग इस बार ना सिर्फ रैलियों में लड़ी जा रही है बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पक्ष-विपक्ष आमने-सामने हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह ब्लॉग लिखकर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा, उन्होंने वंशवाद-लोकतंत्र-संसद समेत के कई मुद्दों पर कांग्रेस को घेरा. प्रधानमंत्री ने गिनाया कि उनके कार्यकाल के दौरान कई काम ऐसे हुए हैं जो कांग्रेस सरकारों के दौरान नहीं हुए थे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा कि इमरजेंसी लागू कर कांग्रेस ने साबित किया कि वह एक वंश की रक्षा करने के लिए किस हद तक जा सकती है.

प्रधानमंत्री ने लिखा कि 2014 में देशवासी इस बात से बेहद दुखी थे कि हम सबका प्यारा भारत आखिर फ्रेजाइल फाइव देशों में क्यों है? क्यों किसी सकारात्मक खबर की जगह सिर्फ भ्रष्टाचार, चहेतों को गलत फायदा पहुंचाने और भाई-भतीजावाद जैसी खबरें ही हेडलाइन बनती थीं.

तब आम चुनाव में देशवासियों ने भ्रष्टाचार में डूबी उस सरकार से मुक्ति पाने और एक बेहतर भविष्य के लिए मतदान किया था, वर्ष 2014 का जनादेश ऐतिहासिक था. भारत के इतिहास में पहली बार किसी गैर वंशवादी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था.

जब कोई सरकार ‘Family First’ की बजाए ‘India First’ की भावना के साथ चलती है तो यह उसके काम में भी दिखाई देता है. पीएम ने लिखा कि यह हमारी सरकार की नीतियों और कामकाज का ही असर है कि बीते पांच वर्षों में, भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ब्लॉग में संसद के कामकाज, प्रेस की अभिव्यक्ति, संविधान-न्यायालय और सरकारी संस्थानों के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरा. उन्होंने कहा कि लोकसभा में गैर वंशवादी सरकार थी इसलिए काम हुआ जबकि राज्यसभा में काम नहीं हुआ पाया क्योंकि वहां हंगामा होता रहा. पीएम ने अपने ब्लॉग में इमरजेंसी का मुद्दा भी उठाया.

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा शुरू किए गए ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपन ने भी सोशल मीडिया पर धूम मचाई हुई है, बीते दिनों ट्विटर के जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस कैंपेन ने सोशल मीडिया पर चौकीदार चोर है को पछाड़ दिया है.

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वह 2014 की गर्मियों के दिन थे, जब देशवासियों ने निर्णायक रूप से मत देकर अपना फैसला सुनाया:

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