अयाज मेमन की कलम से / ग्रेट ब्रिटेन को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी न्यूजीलैंड से साझा कर ग्रेटनेस दिखानी चाहिए

खेल डेस्क. इंग्लैंड क्रिकेट की दुनिया का नया चैम्पियन है। वर्ल्ड कप के इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबले में इंग्लैंड को इस आधार पर विजेता घोषित किया गया, क्योंकि उसने मैच में ज्यादा बाउंड्री लगाई थीं। कई पूर्व क्रिकेटरों ने इस नियम पर आपत्ति जताई है। सोशल मीडिया तो खासे गुस्से में है। आईसीसी की उस खेल भावना पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिसका झंडा बुलंद किया जाता रहा है। मैच का फैसला तो दुर्भाग्यपूर्ण रहा ही।

इससे पहले अंतिम ओवर में गुप्टिल का सटीक थ्रो बेन स्टोक्स के बल्ले से लगकर बाउंड्री पार चला गया था। जहां इंग्लैंड को 2 रन मिल रहे थे, वहां 6 रन मिल गए। पूर्व अंपायर साइमन टॉफेल का कहना है कि थ्रो के वक्त दोनों बल्लेबाजों ने एक-दूसरे को क्रॉस नहीं किया था, इसलिए रनिंग के 2 नहीं, बल्कि 1 रन मिलना चाहिए था। तर्क तो तमाम हैं, पर एक बात साफ है- वर्ल्ड कप के फाइनल मैच का नतीजा निकालने में पूरी तरह न्याय नहीं हुआ।

क्या इस स्थिति को संभालने का अब भी कोई रास्ता बचा है?
आईसीसी की बुरी तरह फजीहत हो चुकी है और वह अपनी पुरानी रट पर कायम है- नियम तो नियम है। अब सवाल यह है कि क्या इस स्थिति को संभालने का अब भी कोई रास्ता बचा है? जवाब है- हां। उपाय उसी टीम के हाथ में है, जिसे वर्ल्ड चैम्पियन का खिताब मिला है। ग्रेट ब्रिटेन को ग्रेटनेस दिखाते हुए न्यूजीलैंड के साथ ट्रॉफी शेयर करने का ऐलान कर देना चाहिए। ये खेल की दुनिया में एक ऐतिहासिक कदम होगा। इंग्लैंड तो तब भी वर्ल्ड चैंपियन ही रहेगा, पर उसका खेल की दुनिया में और प्रशंसकों की नजर में दर्जा काफी ऊंचा हो जाएगा।

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