एड्स / 9 सालों में एचआईवी से होने वाली मौतों का आंकड़ा 16 फीसदी तक गिरा, संयुक्त राष्ट्र ने जारी की रिपोर्ट

हेल्थ डेस्क. दुनियाभर में पिछले साल एचआईवी के 17 लाख नए मामले बढ़े लेकिन इससे होने वाली मौतों की संख्या में 2010 से अब तक 16 फीसदी की गिरावट आई है। मंगलवार को जारी संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौतों की संख्या में सबसे ज्यादा कमी साउथ अफ्रीका में आई है। पिछले 9 सालों में अब तक यहां 40 फीसदी तक संक्रमण और मौतें रोकने में सफलता मिली है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एड्स से होने वाली मौतों का आंकड़ा गिर रहा है क्योंकि अब इलाज मुहैया कराने की जद्दोजहद की जा रही है। एचआईवी और टीबी के मामलों को रोकने की कोशिश जारी है। ‘यूएन एड्स’ संस्था के मुताबिक एचआईवी के कारण होने वाली मौतों की संख्या घटकर पिछले साल 7,70,000 हो गई, जो साल 2010 के मुकाबले तकरीबन 33 फीसदी घटी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका अभी भी सर्वाधिक एचआईवी प्रभावित क्षेत्र हैं। सबसे ज्यादा चिंता करने वाली बात पूर्वी यूरोप और एशिया के लिए है, यहां एड्स के नए मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। सेंट्रल एशिया में 29 फीसदी और मध्य एशिया में 10 फीसदी नए मामले सामने आए हैं। वहीं, दक्षिणी अफ्रीका में 10 फीसदी और लेटिन अमेरिका में यह आंकड़ा 7 फीसदी है।

‘यूएन एड्स’ की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दुनियाभर में करीब 3.79 करोड़ लोग एचआईवी से संक्रमित हैं। इनमें से 2.33 करोड़ लोगों को ही ‘एंटी रेट्रोवाइरल’ थेरेपी मिल पा रही है। 2018 में 95 फीसदी नए मामलों का कारण ड्रग इंजेक्शन, समलैंगिक पुरुष, ट्रांसजेंडर, सेक्स वर्कर और कैदियों को बताया गया है। एचआईवी इंफेक्शन के ऐसे नए मामले ज्यादातर पूर्वी यूरोप, सेंट्रल-मध्य एशिया और नॉर्थ अफ्रीका में देखे गए हैं। दुनियाभर के आधे से अधिक देशों में 50 फीसदी आबादी इसकी रोकथाम के लिए प्रोटेक्शन का इस्तेमाल कर रही है।

1990 के दशक के मध्य में एड्स ने भयंकर महामारी का रूप ले लिया था। तब से इस रोग की रोकथाम के लिए संयुक्त राष्ट्र समेत दुनिया की तमाम एजेंसियों ने युद्ध स्तर पर प्रयास शुरू किए। हालिया रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि साल 2017 में इस रोग से आठ लाख लोग मारे गए थे जो पिछले साल घटकर सात लाख सत्तर हजार हो गए।
एड्स खत्म करने के लिए राजनैतिक नेतृत्व की जरूरत
‘यूएन एड्स’ संस्था के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर गुनीला कार्लसन का कहना है, एड्स को खत्म करने के लिए हमे राजनैतिक नेतृत्व की जरूरत है। इंसानों पर फोकस करने की जरूरत है न कि बीमारी पर। एक व्यवस्थित योजना बनाकर पिछड़े लोगों को आगे लाने की जरूरत है। एचआईवी से प्रभावित लोगों तक पहुंचने के लिए मानवाधिकार-आधारित तरीका अपनाएं।

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