उत्तरप्रदेश / अमेठी को हमेशा के लिए भाजपा की बनाने में जुटी हैं स्मृति ईरानी

अमेठी (रवि श्रीवास्तव). पिछले वर्ष राहुल गांधी ने कहा था कि वे अमेठी को सिंगापुर और कैलिफोर्निया की तरह विकसित करेंगे। लेकिन 2019 में अमेठी की जनता ने 15 साल से यहां के सांसद राहुल को हराकर भाजपा की स्मृति ईरानी को चुना। अब स्मृति इस सीट को भाजपा का अभेद्य किला बनाने की राह पर हैं। 6 जुलाई को अमेठी पहुंची स्मृति ने ‘दीदी आपके द्वार’ प्रोग्राम के तहत चौपाल लगाई।

कार्यक्रम में करीब 80 समस्याएं सामने आईं। यही नहीं इससे पहले 23 जून को स्मृति ने अन्नप्राशन का कार्यक्रम भी शुरू किया। उन्होंने अपने हाथों से बच्चों को पहली बार अन्न खिलाया। इसी दिन महिलाओं की गोदभराई का कार्यक्रम भी रखा गया, यहां पूजा की गई और महिलाओं को मेवे के साथ गिफ्ट दिया गया। कार्यक्रम में गोदभराई के लिए करीब 25 महिलाएं और अन्नप्राशन में 10 बच्चे शामिल थे।

वरिष्ठ पत्रकार रतन मणि लाल कहते हैं कि अमेठी कोई मामूली लोकसभा सीट नहीं है। 80 के दशक से यह सर्वविदित हो गया था कि अमेठी का मतलब गांधी फैमिली और इसकी वजह से पिछले 30 सालों में जो सरकारें भी राज्य में बनीं उनमें भी कांग्रेस के साथ एक अलिखित समझौता-सा था कि लोकसभा चुनावों में अमेठी और रायबरेली को नहीं छेड़ना है। उसमें अखिलेश, मायावती और मुलायम की सरकार रही है। 2019 में अमेठी जीत कर स्मृति ने यह संदेश दे दिया है कि अगर प्रदेश सरकार साथ न हो तो कांग्रेस यह सीट नहीं जीत सकती है।

अमेठी के स्थानीय वरिष्ठ पत्रकार शीतला मिश्रा कहते हैं कि 2014 में लोक सभा चुनाव हारने के बाद भी स्मृति ईरानी ने अमेठी के भाजपा संगठन व विकास कार्यों में रुचि ली। उन्होंने समय-समय पर अमेठी का दौरा किया। जनता और कार्यकर्ताओं से सम्पर्क रखने के कारण वे 2019 में विजय पाने में कामयाब हुई हैं। अब अमेठी में भाजपा के सदस्यता अभियान की शुरुआत करने से लेकर संगठन और विकास कार्यों पर उनकी पैनी नजर है।

चाहे बरौलिया में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या का मामला हो या शिलान्यास व उद्घाटन हो, वे सबकी स्वयं निगरानी कर रही हैं। अमेठी में भविष्य में होने वाले विकास कार्यों के लिए 2 महीने में अब तक आधा दर्जन से ज्यादा चिट्ठियां संबंधित राज्य और केंद्र सरकार के मंत्रियों को लिख चुकी हैं। उन्होंने अमेठी की दीदी के रूप में अच्छी पैठ बना ली है। वे अमेठी में राहुल व कांग्रेस को समाप्त कर अपना व भाजपा का गढ़ बनाने में लगी है।

जून में जब स्मृति ईरानी अमेठी आई तो उन्होंने एेलान किया कि वह अमेठी में अपना घर बनाएंगी। दरअसल, इसके पीछे की बड़ी वजह जानकार बताते हैं कि चुनाव कैम्पेन के दौरान विपक्ष उन पर बाहरी होने का इल्जाम लगाता रहा है। इसलिए वे अब अमेठी को अपना स्थाई ठिकाना बनाना चाहती हैं। इसके लिए अमेठी मुख्यालय में उन्होंने जमीन भी देख ली है। उनके करीबियों का मानना है कि स्मृति का घर भी आम जनता के हिसाब से बनेगा, जहां बड़ी पार्किंग के साथ साथ आम जनमानस के बैठने की अच्छी खासी व्यवस्था होगी। सीनियर जर्नलिस्ट दिनकर श्रीवास्तव कहते हैं कि अमेठी वासियों के दिल में जगह बनाने के लिए स्मृति का यह बड़ा दांव होगा।

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