नई दिल्ली / जीडीपी 9% व निर्यात 12% हो तो पूरा होगा ‘द ग्रेट इंडियन ड्रीम

नई दिल्ली. हाल ही में आए सरकारी आंकड़ों में बताया गया कि देश में बेरोजगारी दर 45 वर्ष में सर्वाधिक 6.1% रही। देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पांच साल में सबसे कम 6.8% रहा। दुनियाभर में विकास धीमा पड़ रहा है। देश में कृषि विकास दर धीमी हुई है। कच्चे तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में भारत सरकार ने अगले 5 वर्ष यानी 2024-25 तक देश की अर्थव्यवस्था को दोगुना कर 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। भास्कर ने 5 प्रमुख अर्थशास्त्रियों और विषय विशेषज्ञों से जाना कि सरकार का यह ‘द ग्रेट इंडियन ड्रीम’ कैसे पूरा होगा। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार बताते हैं कि देश में वर्ष 2003 से 2011 तक औसत जीडीपी ग्रोथ 8.5% रही है, तो आज के दौर में भी यह संभव है।

राजीव कुमार ने कहा कि 2019-20 में सात फीसदी जीडीपी ग्रोथ रहने का अनुमान है। वहीं अगले वर्ष 7.5 फीसदी रह सकती है। ऐसे में अगले तीन साल 8.5 से 8.75 फीसदी वास्तविक ग्रोथ से हम जीडीपी को दोगुना कर पाएंगे। हालांकि हमें कुछ कदम अवश्य उठाने होंगे। जैसे निजी निवेश में कमी आ गई है। यह 10 फीसदी तक चला गया है। वित्तीय क्षेत्र में काफी परेशानी हैं। सरकार जल्द ही इस संबंध में कदम उठाने जा रही है। वहीं क्रिसिल के चीफ इकोनाॅमिस्ट डीके जोशी के मुताबिक 50 खरब डॉलर के लक्ष्य को पाया जा सकता है, लेकिन यह अासान नहीं है। सरकार को ज्यादा रिफॉर्म्स करने पड़ेंगे।

जोशी कहते हैं कि ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस बढ़ाना पड़ेगा। सबसे पहले तो आठ फीसदी से अधिक की प्रतिवर्ष जीडीपी वृद्धि दर की आवश्यकता है। िवश्व के कई राष्ट्र जैसे दक्षिण कोरिया, चीन आदि ने इस प्रकार का कार्य किया है। हमें मेन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में प्रदर्शन सुधारना होगा। एक्सपोर्ट बढ़ाना होगा। टिकाऊ विकास के लिए सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देना होगा। निवेश को बढ़ाना होगा जो कि अभी जीडीपी के 30 फीसदी के बराबर है, इसे बढ़ाकर 34 से 35 फीसदी करना होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा पेश किए गए इस वर्ष के बजट में एफडीआई को बढ़ाने वाली कुछ घोषणाएं की गई हैं। केयर रेटिंग्स के चीफ इकोनाॅमिस्ट मदन सबनवीस कहते हैं कि महंगाई की दर को आरबीआई के अनुमान के अनुसार चार फीसदी भी माना जाए तो भी पांच वर्ष में दोगुनी अर्थव्यवस्था के लिए प्रति वर्ष नौ फीसदी जीडीपी बढ़ोतरी दर आवश्यक होगी। एसएमई और निर्यात क्षेत्र में विशेष ध्यान देना चाहिए। इन दोनों से रोजगार भी मिलते हैं। वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या उद्योग को कम ब्याज दर पर लोन मिलने की भी है। हालांकि बीते वर्ष के दौरान ही बैंकों ने एनपीए में कमी की है और सरकार ने बजट में करीब 70 हजार करोड़ रुपए बैंकों को दिए हैं। बैंकों को भी मजबूत करने की आवश्यकता है जिससे कि कंपनी विशेष अपने प्रोजेक्ट आसानी से पूरे कर पाएं।

एक्सिस बैंक के चीफ इकोनाॅमिस्ट सौगत भट्‌टाचार्य कहते हैं कि भारत की अर्थव्यस्था मार्च 2020 तक 30 खरब डॉलर तक पहुंच जाएगी। ऐसे में अगले चार वर्ष में 20 खरब का ही लक्ष्य पाना रह जाएगा। इस लक्ष्य को पाने के लिए 7.5 से 8 फीसदी की जीडीपी दर हर वर्ष बढ़ाने की आवश्यकता होगी। किसानों की आय दोगुना करने के साथ ही कृषि वृद्धि दर करीब 3 फीसदी से बढ़ाकर 4.5 फीसदी करना होगा। ग्रामीण विकास दर सात फीसदी करनी होगी। इसके साथ ही इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश (सरकार ने सौ लाख करोड़ की बात कही है जो सही है), एसएमई सेक्टर को बढ़ाना होगा। देश में घरेलू बचत पर्याप्त नहीं है ऐसे में विदेशी निवेश की आवश्यकता होगी। जहां तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े केक वाली बात है तो यह सही है कि इसका फायदा सभी को मिलेगा। न सिर्फ रोजगार बढ़ेंगे बल्कि कंज्यूमर डिमांड भी बढ़ेगी। इकोनाॅमी बढ़ने का फायदा सभी को मिलेगा।

दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनाॅमिक्स के प्रोफेसर राम सिंह कहते हैं कि रियल एस्टेट क्षेत्र में रिवाइवल आना चाहिए, इससे रोजगार बढ़ेंगे। एक्सपोर्ट बेहतर करना होगा और इस दौरान बेहतर मानसून व कृषि उत्पादन भी आवश्यक है। आठ फीसदी जीडीपी ग्रोथ पर्याप्त नहीं होगी, नौ फीसदी ग्रोथ आवश्यक है। यह तभी संभव है जब आसानी से बैंक से लोन मिले, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) हो। रोजगार बढ़ाने के लिए निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि आधारित उद्योगों पर विशेष ध्यान देना होगा। अर्थव्यवस्था बढ़ी होगी तो इसका लाभ सभी को मिलेगा। साथ ही सरकार के पास भी अतिरिक्त कर राजस्व होगा जिसे वह कमजोर वर्ग के विकास में लगा पाएगी। अर्थव्यवस्था दोगुनी होगी तो प्रतिव्यक्ति आय भी करीब 70 से 75 फीसदी बढ़ेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकारी निवेश बढ़ाना होगा। अमेरिकी-चीन में चल रहे ट्रेड वार का फायदा भारत ले सकता है। चीन में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक और कार मेन्यूफैक्चरिंग कंपनियां अपने प्लांट हटाना चाह रही हैं ऐसे में भारत के पास अवसर है। सबसे बड़ी चुनौती वर्तमान में रोजगार की है।

टीमलीज सर्विसेज के हेड इंडस्ट्रियल मेन्यूफैक्चरिंग एंड इंजीनियरिंग सुदीप सेन ने कहा कि सरकार अगर लक्ष्य को पाती है तो इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में पांच वर्ष में 25 से 30 फीसदी अधिक रोजगार मिलेगा। ऑटो और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र में सात से 10 फीसदी, पॉवर क्षेत्र में आठ से 10 फीसदी, सर्विस सेक्टर में पांच फीसदी वार्षिक रोजगार की वृद्धि होगी। जबकि ट्रैवल और हाॅस्पीटलिटी क्षेत्र में 12 से 15 फीसदी तक रोजगार की वृद्धि होगी। निर्यात बढ़ाने की आवश्यकता को सभी स्वीकार करते हैं। वर्ष 2018-19 के दौरान निर्यात में बढ़ोतरी करीब नौ फीसदी रही।

अर्थव्यवस्था को दोगुना करने के लिए निर्यात बढ़ोतरी कितनी होनी चाहिए पूछने पर फेडरेशन आॅफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ कहते हैं कि कम से कम 12 फीसदी की कंपाउंड बढ़ोतरी चाहिए। हमारे पास अच्छी मात्रा में इंक्यारी आ रही हैं लेकिन प्रतिस्पर्धी कीमत न होने के कारण श्रीलंका, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पीछे हम रह जाते हैं। इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलना चाहिए और जीडीपी में इसका योगदान 25 फीसदी होना चाहिए।

कितना चुनौतीपूर्ण है लक्ष्य, समझें इन सात इंडीकेटर सेे-

जीडीपी: 5 साल तक 8-9% वृद्धि दर चाहिए :

वर्तमान स्थिति: वर्ष 2018-19 में जीडीपी ग्रोथ 6.8% रही। यह ग्रोथ रेट बीते 5 वर्ष में सबसे कम है। जीडीपी वृद्धि कम रहने का मुख्य कारण घरेलू उपभोग में कमी, विश्व में सुस्ती प्रमुख रहे।
दोगुनी के लिए क्या?: आर्थिक सर्वे के अनुसार 8% जीडीपी वृद्धि दर हासिल करनी होगी। वहीं विशेषज्ञों के मुताबिक अगले पांच वर्ष तक 8 से 9% औसत जीडीपी वृद्धि दर हासिल करनी होगी।निवेश: बढ़ाकर 34 फीसदी करना होगा :

वर्तमान स्थिति: अभी निवेश दर करीब 30% है। यूएन रिपोर्ट के मुताबिक भारत 2017-18 के दौरान विदेशी निवेश आकर्षित करने वाले शीर्ष 20 देशों में शामिल है। 2018-19 में विदेशी निवेश 14.2% बढ़ा।
दोगुनी के लिए क्या?: निवेश में और तेजी लानी होगी। यह दर बढ़ाकर जीडीपी की 34-35% करनी होगी। सरकार को कई क्षेत्रों मंे विदेशी पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने वाली नीतियां बनानी होंगी।
महंगाई दर: 4 फीसदी तक बनाए रखनी होगी :

वर्तमान स्थिति: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 2018-19 के दौरान 3.4% रही। जबकि थोक मूल्य सूचकांक 4.3% है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में महंगाई में कमी आई है। यह नियंत्रण में हैं।
दोगुनी के लिए क्या?: पांच वर्ष तक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को 4% के अंदर नियंत्रित करना होगा। जो खासा चुनौती पूर्ण है। महंगाई दर कच्चे तेल की कीमत, वैश्विक शांति और मानसून आदि पर निर्भर करेगा।
कृषि: 5 साल तक 4.5% वृद्धि दर चाहिए :

वर्तमान स्थिति: भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान वर्ष 2018-19 में करीब 14.4% है। कृषि और सहायक क्षेत्र की वास्तविक विकास दर 2.9% वर्ष 2018-19 में रही। जबकि इससे बीते वर्ष यह 5% थी।
दोगुनी के लिए क्या?: किसानों की आमदनी दोगुनी करना होगी। कृषि और सहायक क्षेत्र की विकास दर कम से कम 4 से 4.5% करनी होगी। इसके लिए आवश्यक होगा कि देश में मानसून सामान्य रहे। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को बढ़ाना होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर: निजी निवेश बढ़ाना होगा :

वर्तमान स्थिति: सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर को वर्तमान में अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल किया हुआ है। वर्तमान में करीब 7 लाख करोड़ रु. सालाना इस पर खर्च हो रहे हैं। करीब 28 किमी प्रतिदिन नेशनल हाई-वे बनाए जा रहे हैं।
दोगुनी के लिए क्या?: बजट भाषण में 100 लाख करोड़ रु. अगले 5 वर्ष में खर्च करने का ऐलान किया है। सरकार को बीओटी, पीपीपी, टीओटी आदि के द्वारा इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा। विदेशी निवेश को भी बढ़ाना पड़ेगा।
रुपया: प्रति डॉलर 70 के आसपास रखना होगा :

वर्तमान स्थिति: वर्तमान में एक डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 68.89 है। वर्ष 2018-19 के दौरान रुपया डॉलर के मुकाबले 7.8 फीसदी गिरा है।
दोगुनी के लिए क्या?: विदेशी व्यापार को बढ़ाने के लिए अगले 5 वर्ष में रुपए को डॉलर के मुकाबले लगातार निम्न स्तर (70 रुपए या इससे नीचे) पर रखना होगा।
निर्यात: 12 फीसदी की बढ़ोतरी चाहिए :

वर्तमान स्थिति: वर्ष 2018-19 के दौरान निर्यात में बढ़ोतरी 9.06 फीसदी रही। 331 अरब डॉलर का निर्यात किया गया।
दोगुनी के लिए क्या?: निर्यात क्षेत्र में बढ़ोतरी अगले पांच वर्ष तक 12 फीसदी या इससे अधिक चाहिए। इसके लिए सरकार को एमएसएमई और औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा देना पड़ेगा। जिससे कि निर्यातकों के उत्पाद प्रतिस्पर्धी कीमत के हो सकें।

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